Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.78.35: वृषपर्वा की पुत्री शर्मिष्ठा ने आज मुझसे ऐसी ही बात कही है। ऐसा कहते हुए उसकी आँखें क्रोध से लाल हो रही थीं। वह अत्यन्त अभिमान से भरी हुई थी और उसने उपरोक्त बातें एक बार नहीं, अनेक बार दोहराई थीं। | mahabharat अध्याय 1.78: देवयानी और शर्मिष्ठाका कलह, शर्मिष्ठाद्वारा कुएँमें गिरायी गयी देवयानीको ययातिका निकालना और देवयानीका शुक्राचार्यजीके साथ वार्तालाप । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वृषपर्वा की पुत्री शर्मिष्ठा ने आज मुझसे ऐसी ही बात कही है। ऐसा कहते हुए उसकी आँखें क्रोध से लाल हो रही थीं। वह अत्यन्त अभिमान से भरी हुई थी और उसने उपरोक्त बातें एक बार नहीं, अनेक बार दोहराई थीं।
Sharmishtha, the daughter of Vrishparva, has said such a thing to me today. While saying this, her eyes were turning red with anger. She was full of great pride and she has repeated the above words not just once, but many times.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥