Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.78.34: देवयानी, तुम उस महाराज की पुत्री हो जो स्तुति गाता है, भिक्षा मांगता है और नियमित रूप से भिक्षा स्वीकार करता है और मैं उस महाराज की पुत्री हूं जिसकी तुम्हारे पिता प्रशंसा करते हैं, जो स्वयं भिक्षा देते हैं और बदले में एक पैसा भी नहीं लेते। | mahabharat अध्याय 1.78: देवयानी और शर्मिष्ठाका कलह, शर्मिष्ठाद्वारा कुएँमें गिरायी गयी देवयानीको ययातिका निकालना और देवयानीका शुक्राचार्यजीके साथ वार्तालाप । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
देवयानी, तुम उस महाराज की पुत्री हो जो स्तुति गाता है, भिक्षा मांगता है और नियमित रूप से भिक्षा स्वीकार करता है और मैं उस महाराज की पुत्री हूं जिसकी तुम्हारे पिता प्रशंसा करते हैं, जो स्वयं भिक्षा देते हैं और बदले में एक पैसा भी नहीं लेते।
Devayani, you are the daughter of one who sings praises, begs alms and accepts alms regularly and I am the daughter of that Maharaja whom your father praises, who himself gives alms and does not take even a penny in return.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥