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mahabharat 1.78.33: आज वृषपर्वा की प्रिय पुत्री शर्मिष्ठा क्रोध से लाल नेत्रों वाली मुझसे अत्यन्त कठोर एवं कटु वचनों में इस प्रकार बोल रही थी- ॥33॥   |   mahabharat अध्याय 1.78: देवयानी और शर्मिष्ठाका कलह, शर्मिष्ठाद्वारा कुएँमें गिरायी गयी देवयानीको ययातिका निकालना और देवयानीका शुक्राचार्यजीके साथ वार्तालाप   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 78: देवयानी और शर्मिष्ठाका कलह, शर्मिष्ठाद्वारा कुएँमें गिरायी गयी देवयानीको ययातिका निकालना और देवयानीका शुक्राचार्यजीके साथ वार्तालाप  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  1.78.33 
एवं हि मे कथयति शर्मिष्ठा वार्षपर्वणी।
वचनं तीक्ष्णपरुषं क्रोधरक्तेक्षणा भृशम्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
आज वृषपर्वा की प्रिय पुत्री शर्मिष्ठा क्रोध से लाल नेत्रों वाली मुझसे अत्यन्त कठोर एवं कटु वचनों में इस प्रकार बोल रही थी- ॥33॥
 
Today, Vrishparva's beloved daughter Sharmishtha, with her eyes red with anger, was speaking to me in very harsh and harsh words like this - ॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)