Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.78.32: आज वृषपर्वा की पुत्री शर्मिष्ठा ने मुझसे जो कहा, क्या वह सच है? वह कहती है, 'तुम भाटों की भाँति राक्षसों का गुणगान करते हो।' 32.   |   mahabharat अध्याय 1.78: देवयानी और शर्मिष्ठाका कलह, शर्मिष्ठाद्वारा कुएँमें गिरायी गयी देवयानीको ययातिका निकालना और देवयानीका शुक्राचार्यजीके साथ वार्तालाप   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 78: देवयानी और शर्मिष्ठाका कलह, शर्मिष्ठाद्वारा कुएँमें गिरायी गयी देवयानीको ययातिका निकालना और देवयानीका शुक्राचार्यजीके साथ वार्तालाप  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  1.78.32 
शर्मिष्ठया यदुक्तास्मि दुहित्रा वृषपर्वण:।
सत्यं किलैतत् सा प्राह दैत्यानामसि गायन:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
आज वृषपर्वा की पुत्री शर्मिष्ठा ने मुझसे जो कहा, क्या वह सच है? वह कहती है, 'तुम भाटों की भाँति राक्षसों का गुणगान करते हो।' 32.
 
Is it true what Sharmishtha, the daughter of Vrishparva, has told me today? She says, 'You sing the praises of demons like a bard.' 32.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)