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mahabharat 1.78.25-26h: देवयानी बोली, "घुर्णिके! तुम शीघ्र जाओ और मेरे पिता से शीघ्र कहो, 'मैं अब वृषपर्वा नगर में पैर नहीं रखूंगी।'   |   mahabharat अध्याय 1.78: देवयानी और शर्मिष्ठाका कलह, शर्मिष्ठाद्वारा कुएँमें गिरायी गयी देवयानीको ययातिका निकालना और देवयानीका शुक्राचार्यजीके साथ वार्तालाप   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 78: देवयानी और शर्मिष्ठाका कलह, शर्मिष्ठाद्वारा कुएँमें गिरायी गयी देवयानीको ययातिका निकालना और देवयानीका शुक्राचार्यजीके साथ वार्तालाप  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  1.78.25-26h 
देवयान्युवाच
त्वरितं घूर्णिके गच्छ शीघ्रमाचक्ष्व मे पितु:॥ २५॥
नेदानीं सम्प्रवेक्ष्यामि नगरं वृषपर्वण:।
 
 
अनुवाद
देवयानी बोली, "घुर्णिके! तुम शीघ्र जाओ और मेरे पिता से शीघ्र कहो, 'मैं अब वृषपर्वा नगर में पैर नहीं रखूंगी।'
 
Devayani said, "Ghurnike! You go quickly and quickly tell my father, 'I will not set foot in the city of Vrishparva anymore.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)