श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 78: देवयानी और शर्मिष्ठाका कलह, शर्मिष्ठाद्वारा कुएँमें गिरायी गयी देवयानीको ययातिका निकालना और देवयानीका शुक्राचार्यजीके साथ वार्तालाप  »  श्लोक 22-d7
 
 
श्लोक  1.78.22-d7 
वैशम्पायन उवाच
तामथो ब्राह्मणीं राजा विज्ञाय नहुषात्मज:॥ २२॥
गृहीत्वा दक्षिणे पाणावुज्जहार ततोऽवटात्।
उद्‍धृत्य चैनां तरसा तस्मात् कूपान्नराधिप:॥ २३॥
(गच्छ भद्रे यथाकामं न भयं विद्यते तव।
इत्युच्यमाना नृपतिं देवयानी तमुत्तरम्॥
उवाच मां त्वमादाय गच्छ शीघ्रं प्रियो हि मे।
गृहीताहं त्वया पाणौ तस्माद् भर्त्ता भविष्यसि॥
इत्येवमुक्तो नृपतिराह क्षत्रकुलोद्भव:।
त्वं भद्रे ब्राह्मणी तस्मान्मया नार्हसि सङ्गमम्॥
सर्वलोकगुरु: काव्यस्त्वं तस्य दुहितासि वै।
तस्मादपि भयं मेऽद्य तस्मात् कल्याणि नार्हसि॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! तत्पश्चात, नहुष के पुत्र राजा ययाति ने देवयानी को ब्राह्मण कन्या जानकर उसका दाहिना हाथ अपने हाथ में लेकर उसे कुएँ से बाहर खींच लिया। उसे तुरन्त कुएँ से बाहर निकालकर राजा ययाति ने उससे कहा - 'भद्रे! अब तुम जहाँ चाहो वहाँ जाओ। तुम्हें कोई भय नहीं है।' राजा ययाति के ऐसा कहने पर देवयानी ने उन्हें उत्तर दिया - 'आप मुझे शीघ्र ही अपने साथ ले चलो; क्योंकि आप मेरे प्रियतम हैं। आपने मेरा हाथ पकड़ा है, अतः आप मेरे पति होंगे।' देवयानी के ऐसा कहने पर राजा ने कहा - 'भद्रे! मैं क्षत्रिय कुल में उत्पन्न हुआ हूँ और तुम ब्राह्मण कन्या हो। अतः तुम्हें मेरे साथ समागम नहीं करना चाहिए। कल्याणी! भगवान शुक्राचार्य सम्पूर्ण जगत के गुरु हैं और तुम उनकी पुत्री हो, अतः मुझे उनसे भी भय है। तुम मेरे समान तुच्छ पुरुष के योग्य कदापि नहीं हो सकती।'
 
Vaishampayana says - Janamejaya! Thereafter, Nahusha's son King Yayati, knowing Devayani to be a Brahmin girl, took her right hand in his hand and pulled her out of the well. Quickly pulling her out of the well, King Yayati said to her - 'Bhaadre! Now go wherever you want. You have no fear.' On King Yayati saying this, Devayani replied to him - 'You take me with you soon; because you are my beloved. You have held my hand, so you will be my husband.' On Devayani saying this, the king said - 'Bhaadre! I am born in a Kshatriya family and you are a Brahmin girl. Therefore, you should not have intercourse with me. Kalyani! Lord Shukracharya is the Guru of the entire world and you are his daughter, so I am afraid of him too. You are never worthy of an insignificant man like me.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)