श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 78: देवयानी और शर्मिष्ठाका कलह, शर्मिष्ठाद्वारा कुएँमें गिरायी गयी देवयानीको ययातिका निकालना और देवयानीका शुक्राचार्यजीके साथ वार्तालाप  »  श्लोक 20-22h
 
 
श्लोक  1.78.20-22h 
एष मे दक्षिणो राजन् पाणिस्ताम्रनखाङ्गुलि:॥ २०॥
समुद्धर गृहीत्वा मां कुलीनस्त्वं हि मे मत:।
जानामि त्वां हि संशान्तं वीर्यवन्तं यशस्विनम्॥ २१॥
तस्मान्मां पतितामस्मात् कूपादुद्धर्तुमर्हसि।
 
 
अनुवाद
(देवयानी बोली-) महाराज! यह मेरा लाल नाखूनों और उँगलियों वाला दाहिना हाथ है। इसे पकड़कर कृपया मुझे इस कुएँ से बाहर निकालिए। मैं जानती हूँ कि आप एक कुलीन कुल में जन्मे राजा हैं। मैं यह भी जानती हूँ कि आप अत्यंत शांत स्वभाव के व्यक्ति, पराक्रमी और यशस्वी योद्धा हैं। अतः कृपया मुझ असहाय स्त्री को, जो इस कुएँ में गिरी हुई है, बचाइए।
 
(Devyani said-) Maharaj! This is my right hand with red nails and fingers. Holding it, please rescue me from this well. I know, you are a king born in a noble family. I also know that you are a person of very calm nature, a mighty and famous warrior. Therefore, please rescue me, a helpless woman, who has fallen in this well.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)