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mahabharat 1.78.2: तब उन सबने मिलकर इन्द्र से कहा - 'पुरन्दर! अब समय आ गया है कि तुम अपना पराक्रम दिखाओ, अपने शत्रुओं का संहार करो।'॥2॥   |   mahabharat अध्याय 1.78: देवयानी और शर्मिष्ठाका कलह, शर्मिष्ठाद्वारा कुएँमें गिरायी गयी देवयानीको ययातिका निकालना और देवयानीका शुक्राचार्यजीके साथ वार्तालाप   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 78: देवयानी और शर्मिष्ठाका कलह, शर्मिष्ठाद्वारा कुएँमें गिरायी गयी देवयानीको ययातिका निकालना और देवयानीका शुक्राचार्यजीके साथ वार्तालाप  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.78.2 
सर्व एव समागम्य शतक्रतुमथाब्रुवन्।
कालस्ते विक्रमस्याद्य जहि शत्रून् पुरन्दर॥ २॥
 
 
अनुवाद
तब उन सबने मिलकर इन्द्र से कहा - 'पुरन्दर! अब समय आ गया है कि तुम अपना पराक्रम दिखाओ, अपने शत्रुओं का संहार करो।'॥2॥
 
Then all of them together said to Indra - 'Purandara! Now the time has come for you to show your bravery, kill your enemies.'॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)