देवयान्युवाच
योऽसौ देवैर्हतान् दैत्यानुत्थापयति विद्यया॥ १९॥
तस्य शुक्रस्य कन्याहं स मां नूनं न बुध्यते।
अनुवाद
देवयानी बोली - मैं शुक्राचार्य की पुत्री हूँ जो देवताओं द्वारा मारे गए दैत्यों को अपनी विद्या के बल से जिला देते हैं। उन्हें निश्चय ही यह पता नहीं होगा कि मैं इस दयनीय अवस्था में हूँ॥19 1/2॥
Devayani said - I am the daughter of Shukracharya who revives the demons killed by the gods with the power of his knowledge. He certainly would not know that I am in this miserable condition.॥ 19 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥