दीर्घं ध्यायसि चात्यर्थं कस्माच्छोचसि चातुरा।
कथं च पतितास्यस्मिन् कूपे वीरुत्तृणावृते॥ १८॥
दुहिता चैव कस्य त्वं वद सत्यं सुमध्यमे।
अनुवाद
'तुम्हें बहुत भारी चिंता हो रही है। तुम इतना शोक क्यों कर रही हो? तुम इस घास और लताओं से ढके हुए कुएँ में कैसे गिर पड़ी? तुम किसकी पुत्री हो? सुमध्यमे! मुझे ठीक-ठीक बताओ।'॥18 1/2॥
‘You are in some very grave worry. Why are you so anxiously mourning? How did you fall into this well covered with grass and creepers? Whose daughter are you? Sumadhyme! Tell me exactly.’॥ 18 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥