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mahabharat 1.78.18-19h: 'तुम्हें बहुत भारी चिंता हो रही है। तुम इतना शोक क्यों कर रही हो? तुम इस घास और लताओं से ढके हुए कुएँ में कैसे गिर पड़ी? तुम किसकी पुत्री हो? सुमध्यमे! मुझे ठीक-ठीक बताओ।'॥18 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 1.78: देवयानी और शर्मिष्ठाका कलह, शर्मिष्ठाद्वारा कुएँमें गिरायी गयी देवयानीको ययातिका निकालना और देवयानीका शुक्राचार्यजीके साथ वार्तालाप   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 78: देवयानी और शर्मिष्ठाका कलह, शर्मिष्ठाद्वारा कुएँमें गिरायी गयी देवयानीको ययातिका निकालना और देवयानीका शुक्राचार्यजीके साथ वार्तालाप  »  श्लोक 18-19h
 
 
श्लोक  1.78.18-19h 
दीर्घं ध्यायसि चात्यर्थं कस्माच्छोचसि चातुरा।
कथं च पतितास्यस्मिन् कूपे वीरुत्तृणावृते॥ १८॥
दुहिता चैव कस्य त्वं वद सत्यं सुमध्यमे।
 
 
अनुवाद
'तुम्हें बहुत भारी चिंता हो रही है। तुम इतना शोक क्यों कर रही हो? तुम इस घास और लताओं से ढके हुए कुएँ में कैसे गिर पड़ी? तुम किसकी पुत्री हो? सुमध्यमे! मुझे ठीक-ठीक बताओ।'॥18 1/2॥
 
‘You are in some very grave worry. Why are you so anxiously mourning? How did you fall into this well covered with grass and creepers? Whose daughter are you? Sumadhyme! Tell me exactly.’॥ 18 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)