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mahabharat 1.78.17: महाबली राजा ययाति ने पहले तो उसे बहुत ही मधुर शब्दों में आश्वस्त किया और कहा, "तुम कौन हो? तुम्हारे नाखून लाल हैं। तुम एक युवती प्रतीत होती हो। तुम्हारे कानों में पड़े बहुमूल्य कुंडल बहुत सुंदर और चमकदार हैं।"   |   mahabharat अध्याय 1.78: देवयानी और शर्मिष्ठाका कलह, शर्मिष्ठाद्वारा कुएँमें गिरायी गयी देवयानीको ययातिका निकालना और देवयानीका शुक्राचार्यजीके साथ वार्तालाप   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 78: देवयानी और शर्मिष्ठाका कलह, शर्मिष्ठाद्वारा कुएँमें गिरायी गयी देवयानीको ययातिका निकालना और देवयानीका शुक्राचार्यजीके साथ वार्तालाप  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  1.78.17 
सान्त्वयित्वा नृपश्रेष्ठ: साम्ना परमवल्गुना।
का त्वं ताम्रनखी श्यामा सुमृष्टमणिकुण्डला॥ १७॥
 
 
अनुवाद
महाबली राजा ययाति ने पहले तो उसे बहुत ही मधुर शब्दों में आश्वस्त किया और कहा, "तुम कौन हो? तुम्हारे नाखून लाल हैं। तुम एक युवती प्रतीत होती हो। तुम्हारे कानों में पड़े बहुमूल्य कुंडल बहुत सुंदर और चमकदार हैं।"
 
The great king Yayati first assured her with very sweet words and said, 'Who are you? Your nails are red. You appear to be a young girl. The precious earrings in your ears are very beautiful and shiny.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)