Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.78.15: सारथी और अन्य घोड़े भी थके हुए थे। वे एक जंगली जानवर को पकड़ने के लिए उसके पीछे गए थे और प्यास से तड़प रहे थे। ययाति उस निर्जल कुएँ को देखने लगे। 15. | mahabharat अध्याय 1.78: देवयानी और शर्मिष्ठाका कलह, शर्मिष्ठाद्वारा कुएँमें गिरायी गयी देवयानीको ययातिका निकालना और देवयानीका शुक्राचार्यजीके साथ वार्तालाप । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्रान्तयुग्य: श्रान्तहयो मृगलिप्सु: पिपासित:।
स नाहुष: प्रेक्षमाण उदपानं गतोदकम्॥ १५॥
अनुवाद
सारथी और अन्य घोड़े भी थके हुए थे। वे एक जंगली जानवर को पकड़ने के लिए उसके पीछे गए थे और प्यास से तड़प रहे थे। ययाति उस निर्जल कुएँ को देखने लगे। 15.
The charioteer and other horses were also tired. They had followed a wild animal to catch it and were suffering from thirst. Yayati started looking at that waterless well. 15.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥