Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.78.12-13: वैशम्पायन कहते हैं - जनमेजय! देवयानी ने सत्य बोलकर अपनी श्रेष्ठता और महत्ता सिद्ध की और शर्मिष्ठा के शरीर से अपने वस्त्र खींचने लगी। यह देखकर शर्मिष्ठा ने उसे कुएँ में धकेल दिया और यह सोचकर कि अब तो वह मर ही गई होगी, पाप-विचार करती हुई शर्मिष्ठा नगर को लौट गई। 12-13। | mahabharat अध्याय 1.78: देवयानी और शर्मिष्ठाका कलह, शर्मिष्ठाद्वारा कुएँमें गिरायी गयी देवयानीको ययातिका निकालना और देवयानीका शुक्राचार्यजीके साथ वार्तालाप । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायन कहते हैं - जनमेजय! देवयानी ने सत्य बोलकर अपनी श्रेष्ठता और महत्ता सिद्ध की और शर्मिष्ठा के शरीर से अपने वस्त्र खींचने लगी। यह देखकर शर्मिष्ठा ने उसे कुएँ में धकेल दिया और यह सोचकर कि अब तो वह मर ही गई होगी, पाप-विचार करती हुई शर्मिष्ठा नगर को लौट गई। 12-13।
Vaishampayana says - Janamejaya! Devayani proved her superiority and importance by speaking the truth and started pulling her clothes from Sharmishtha's body. Seeing this, Sharmishtha pushed her into the well and thinking that she must be dead now, Sharmishtha with sinful thoughts returned to the city. 12-13.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥