Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.77.8: देवयानी! जैसे मेरे गुरुदेव और तुम्हारे पिता शुक्राचार्य मेरे लिए सदैव आदरणीय हैं, वैसे ही तुम भी आदरणीय हो; इसलिए तुम्हें मुझसे ऐसी बातें नहीं कहनी चाहिए ॥8॥ | mahabharat अध्याय 1.77: देवयानीका कचसे पाणिग्रहणके लिये अनुरोध, कचकी अस्वीकृति तथा दोनोंका एक-दूसरेको शाप देना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
देवयानी! जैसे मेरे गुरुदेव और तुम्हारे पिता शुक्राचार्य मेरे लिए सदैव आदरणीय हैं, वैसे ही तुम भी आदरणीय हो; इसलिए तुम्हें मुझसे ऐसी बातें नहीं कहनी चाहिए ॥8॥
Devayani! Just as my Gurudev and your father Shukrachary are always respected by me, so are you; therefore you should not say such things to me. ॥ 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥