Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.77.6: कचना ने कहा, "हे निर्दोष अंगों वाली देवयानी! जैसे तुम्हारे पिता भगवान शुक्राचार्य मेरे लिए पूजनीय और आदरणीय हैं, वैसे ही तुम भी मेरे लिए पूजनीय हो; बल्कि तुम उनसे भी अधिक पूजनीय हो।" | mahabharat अध्याय 1.77: देवयानीका कचसे पाणिग्रहणके लिये अनुरोध, कचकी अस्वीकृति तथा दोनोंका एक-दूसरेको शाप देना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कच उवाच
पूज्यो मान्यश्च भगवान् यथा तव पिता मम।
तथा त्वमनवद्याङ्गि पूजनीयतरा मम॥ ६॥
अनुवाद
कचना ने कहा, "हे निर्दोष अंगों वाली देवयानी! जैसे तुम्हारे पिता भगवान शुक्राचार्य मेरे लिए पूजनीय और आदरणीय हैं, वैसे ही तुम भी मेरे लिए पूजनीय हो; बल्कि तुम उनसे भी अधिक पूजनीय हो।"
Kachana said, "O Devayani with flawless body parts! Just as your father Lord Shukracharya is worshipful and respectable to me, you are also worshipful to me; in fact you are even more worshipful than him."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥