Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.77.5: अब तुमने अपना व्रत पूर्ण कर लिया है और अभीष्ट ज्ञान प्राप्त कर लिया है। मैं तुमसे प्रेम करती हूँ, कृपया मुझे स्वीकार करो; वैदिक मन्त्रों का उच्चारण करके विधिपूर्वक मुझसे विवाह करो।॥5॥ | mahabharat अध्याय 1.77: देवयानीका कचसे पाणिग्रहणके लिये अनुरोध, कचकी अस्वीकृति तथा दोनोंका एक-दूसरेको शाप देना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स समावृतविद्यो मां भक्तां भजितुमर्हसि।
गृहाण पाणिं विधिवन्मम मन्त्रपुरस्कृतम्॥ ५॥
अनुवाद
अब तुमने अपना व्रत पूर्ण कर लिया है और अभीष्ट ज्ञान प्राप्त कर लिया है। मैं तुमसे प्रेम करती हूँ, कृपया मुझे स्वीकार करो; वैदिक मन्त्रों का उच्चारण करके विधिपूर्वक मुझसे विवाह करो।॥5॥
‘Now you have completed your fast and have attained the knowledge you desired. I love you, please accept me; please marry me as per the rituals by reciting Vedic mantras.’॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥