Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.77.4: 'तपधान! यह जानकर, कृपया मेरी बात पर विचार करो। जब तुम व्रत और नियमों का पालन करते थे, तब मैंने तुम्हारे साथ जो व्यवहार किया था, उसे तुम भूले नहीं होगे॥ 4॥ | mahabharat अध्याय 1.77: देवयानीका कचसे पाणिग्रहणके लिये अनुरोध, कचकी अस्वीकृति तथा दोनोंका एक-दूसरेको शाप देना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'तपधान! यह जानकर, कृपया मेरी बात पर विचार करो। जब तुम व्रत और नियमों का पालन करते थे, तब मैंने तुम्हारे साथ जो व्यवहार किया था, उसे तुम भूले नहीं होगे॥ 4॥
'Tapadhan! Knowing this, please think about what I am saying. You must not have forgotten the way I treated you during the days when you were engaged in observing fasts and rules.॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥