Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.77.23: देवताओं ने कहा - हे ब्रह्मन्! आपने हमारे हित के लिए अद्भुत कार्य किया है, इसलिए आपकी कीर्ति कभी क्षीण नहीं होगी और आप यज्ञ में भाग लेने के अधिकारी होंगे। | mahabharat अध्याय 1.77: देवयानीका कचसे पाणिग्रहणके लिये अनुरोध, कचकी अस्वीकृति तथा दोनोंका एक-दूसरेको शाप देना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
देवा ऊचु:
यत् त्वयास्मद्धितं कर्म कृतं वै परमाद्भुतम्।
न ते यश: प्रणशिता भागभाक् च भविष्यसि॥ २३॥
अनुवाद
देवताओं ने कहा - हे ब्रह्मन्! आपने हमारे हित के लिए अद्भुत कार्य किया है, इसलिए आपकी कीर्ति कभी क्षीण नहीं होगी और आप यज्ञ में भाग लेने के अधिकारी होंगे।
The gods said - O Brahman! You have done a wonderful deed for our benefit, therefore your fame will never fade away and you will be entitled to take part in the yagya.
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि सम्भवपर्वणि ययात्युपाख्याने सप्तसप्ततितमोऽध्याय:॥ ७७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत सम्भवपर्वमें ययात्युपाख्यानविषयक सतहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७७॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥