Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.77.20: तुमने जो मुझसे कहा कि तुम्हारी विद्या फलदायी नहीं होगी, वह तो ठीक है; परंतु जिसे मैं यह विद्या सिखाऊँगा, उसकी विद्या अवश्य फलदायी होगी ॥ 20॥ | mahabharat अध्याय 1.77: देवयानीका कचसे पाणिग्रहणके लिये अनुरोध, कचकी अस्वीकृति तथा दोनोंका एक-दूसरेको शाप देना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
फलिष्यति न ते विद्या यत् त्वं मामात्थ तत् तथा।
अध्यापयिष्यामि तु यं तस्य विद्या फलिष्यति॥ २०॥
अनुवाद
तुमने जो मुझसे कहा कि तुम्हारी विद्या फलदायी नहीं होगी, वह तो ठीक है; परंतु जिसे मैं यह विद्या सिखाऊँगा, उसकी विद्या अवश्य फलदायी होगी ॥ 20॥
What you told me that your learning will not be fruitful is correct; but the one to whom I will teach this learning, his learning will surely be fruitful. ॥ 20॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥