Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.77.17: कच्छ बोला- देवयानी! मैंने तुम्हारी प्रार्थना केवल इसलिए अस्वीकार की है क्योंकि मैं तुम्हें अपने गुरु की पुत्री मानता हूँ; मुझे तुममें कोई दोष नहीं दिखाई दिया। मेरे गुरु ने भी मुझे इस विषय में कोई आदेश नहीं दिया है। तुम मुझे जो चाहो श्राप दे दो। | mahabharat अध्याय 1.77: देवयानीका कचसे पाणिग्रहणके लिये अनुरोध, कचकी अस्वीकृति तथा दोनोंका एक-दूसरेको शाप देना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कच्छ बोला- देवयानी! मैंने तुम्हारी प्रार्थना केवल इसलिए अस्वीकार की है क्योंकि मैं तुम्हें अपने गुरु की पुत्री मानता हूँ; मुझे तुममें कोई दोष नहीं दिखाई दिया। मेरे गुरु ने भी मुझे इस विषय में कोई आदेश नहीं दिया है। तुम मुझे जो चाहो श्राप दे दो।
Kachha said— Devyani! I have rejected your request only because I consider you to be my Guru's daughter; I have not seen any fault in you. My Guru has also not given me any orders in this matter. Curse me as you wish.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥