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देवयान्युवाच
यदि मां धर्मकामार्थे प्रत्याख्यास्यसि याचित:।
तत: कच न ते विद्या सिद्धिमेषा गमिष्यति॥ १६॥
अनुवाद
देवयानी बोली - कच! मैंने धर्मानुसार कार्य करने के लिए आपसे प्रार्थना की है। यदि आप मुझे अस्वीकार कर देंगे तो आपकी संजीवनी विद्या सफल नहीं होगी।
Devayani said - Kacha! I have prayed to you for a work in accordance with Dharma. If you reject me, then your Sanjeevani Vidya will not be successful. 16.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥