Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.77.1-2: वैशम्पायन कहते हैं - जब कचक का व्रत समाप्त हो गया और गुरु ने उसे जाने की अनुमति दे दी, तब वह देवलोक को गया। उस समय देवयानी ने उससे कहा - 'महर्षि अंगिरा के पौत्र! तुम अपने सदाचार, उत्तम कुल, ज्ञान, तप और संयम के कारण अत्यन्त सुन्दर दिख रहे हो।' 1-2. | mahabharat अध्याय 1.77: देवयानीका कचसे पाणिग्रहणके लिये अनुरोध, कचकी अस्वीकृति तथा दोनोंका एक-दूसरेको शाप देना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायन कहते हैं - जब कचक का व्रत समाप्त हो गया और गुरु ने उसे जाने की अनुमति दे दी, तब वह देवलोक को गया। उस समय देवयानी ने उससे कहा - 'महर्षि अंगिरा के पौत्र! तुम अपने सदाचार, उत्तम कुल, ज्ञान, तप और संयम के कारण अत्यन्त सुन्दर दिख रहे हो।' 1-2.
Vaishampayana says - When the Kachka fast was over and the Guru permitted him to leave, then he went to Devlok. At that time Devayani said to him - 'Grandson of Maharishi Angira! You are looking very beautiful due to your good conduct, good family, knowledge, penance and self-control. 1-2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥