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mahabharat 1.76.72: कचना ने एक हजार वर्ष तक अपने गुरु के सान्निध्य में रहकर अपनी प्रतिज्ञा पूरी की। फिर घर जाने की अनुमति पाकर कचना ने देवलोक जाने का विचार किया। 72.   |   mahabharat अध्याय 1.76: कचका शिष्यभावसे शुक्राचार्य और देवयानीकी सेवामें संलग्न होना और अनेक कष्ट सहनेके पश्चात् मृतसंजीवनी विद्या प्राप्त करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 76: कचका शिष्यभावसे शुक्राचार्य और देवयानीकी सेवामें संलग्न होना और अनेक कष्ट सहनेके पश्चात् मृतसंजीवनी विद्या प्राप्त करना  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  1.76.72 
गुरोरुष्य सकाशे तु दशवर्षशतानि स:।
अनुज्ञात: कचो गन्तुमियेष त्रिदशालयम्॥ ७२॥
 
 
अनुवाद
कचना ने एक हजार वर्ष तक अपने गुरु के सान्निध्य में रहकर अपनी प्रतिज्ञा पूरी की। फिर घर जाने की अनुमति पाकर कचना ने देवलोक जाने का विचार किया। 72.
 
Kachana completed his vow by staying in the presence of his Guru for a thousand years. Then, after getting permission to go home, Kachana thought of going to Devlok. 72.
 
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि सम्भवपर्वणि ययात्युपाख्याने षट्सप्ततितमोऽध्याय:॥ ७६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत सम्भवपर्वमें ययात्युपाख्यानविषयक छिहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७६॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके २ श्लोक मिलाकर कुल ७४ श्लोक हैं)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)