श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 76: कचका शिष्यभावसे शुक्राचार्य और देवयानीकी सेवामें संलग्न होना और अनेक कष्ट सहनेके पश्चात् मृतसंजीवनी विद्या प्राप्त करना  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  1.76.60 
पुत्रो भूत्वा भावय भावितो मा-
मस्मद्देहादुपनिष्क्रम्य तात।
समीक्षेथा धर्मवतीमवेक्षां
गुरो: सकाशात् प्राप्य विद्यां सविद्य:॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
तात! मेरे इस शरीर से जीवित निकलकर मेरे पुत्र के समान बनो और मुझे पुनः जीवित करो। मेरे गुरु से शिक्षा प्राप्त करके विद्वान् हो जाने पर भी मेरी ओर धर्म-भाव से देखो। 60॥
 
Tat! Come out of this body of mine alive and be like a son to me and revive me again. Even after becoming a scholar after receiving education from my Guru, look towards me with a religious attitude. 60॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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