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श्लोक 1.76.60  |
पुत्रो भूत्वा भावय भावितो मा-
मस्मद्देहादुपनिष्क्रम्य तात।
समीक्षेथा धर्मवतीमवेक्षां
गुरो: सकाशात् प्राप्य विद्यां सविद्य:॥ ६०॥ |
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| अनुवाद |
| तात! मेरे इस शरीर से जीवित निकलकर मेरे पुत्र के समान बनो और मुझे पुनः जीवित करो। मेरे गुरु से शिक्षा प्राप्त करके विद्वान् हो जाने पर भी मेरी ओर धर्म-भाव से देखो। 60॥ |
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| Tat! Come out of this body of mine alive and be like a son to me and revive me again. Even after becoming a scholar after receiving education from my Guru, look towards me with a religious attitude. 60॥ |
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