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श्लोक 1.76.59  |
न निवर्तेत् पुनर्जीवन् कश्चिदन्यो ममोदरात्।
ब्राह्मणं वर्जयित्वैकं तस्माद् विद्यामवाप्नुहि॥ ५९॥ |
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| अनुवाद |
| ब्राह्मण के अतिरिक्त कोई भी ऐसा नहीं है जो मेरे गर्भ से पुनः जीवित होकर उत्पन्न हो सके। अतः तुम्हें ज्ञान प्राप्त करना चाहिए। |
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| There is no one except a Brahmin who can come out of my womb alive again. Therefore you should acquire knowledge. 59. |
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