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mahabharat 1.76.44: अब देवयानी ने पुनः अपने पिता से कहा - 'पिताजी! कच्छ मेरे आदेशानुसार प्रत्येक कार्य पूर्ण करता है। आज मैंने उसे पुष्प लाने के लिए भेजा था, किन्तु अब तक वह प्रकट नहीं हुआ।'   |   mahabharat अध्याय 1.76: कचका शिष्यभावसे शुक्राचार्य और देवयानीकी सेवामें संलग्न होना और अनेक कष्ट सहनेके पश्चात् मृतसंजीवनी विद्या प्राप्त करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 76: कचका शिष्यभावसे शुक्राचार्य और देवयानीकी सेवामें संलग्न होना और अनेक कष्ट सहनेके पश्चात् मृतसंजीवनी विद्या प्राप्त करना  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  1.76.44 
देवयान्यथ भूयोऽपि पितरं वाक्यमब्रवीत्।
पुष्पाहार: प्रेषणकृत् कचस्तात न दृश्यते॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
अब देवयानी ने पुनः अपने पिता से कहा - 'पिताजी! कच्छ मेरे आदेशानुसार प्रत्येक कार्य पूर्ण करता है। आज मैंने उसे पुष्प लाने के लिए भेजा था, किन्तु अब तक वह प्रकट नहीं हुआ।'
 
Now Devayani again told her father this - 'Father! Kachha completes every task on my instructions. Today I had sent him to bring flowers, but till now he has not appeared. 44.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)