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श्लोक 1.76.39  |
आहूतो विद्यया भद्रे भार्गवेण महात्मना।
त्वत्समीपमिहायात: कथंचित् समजीवित:॥ ३९॥ |
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| अनुवाद |
| 'भरे! फिर जब महात्मा भार्गव ने अपनी विद्या से मुझे बुलाया, तब किसी प्रकार पूर्ण आयु प्राप्त करके मैं यहाँ आपके पास आ सका।'॥39॥ |
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| 'Bhaare! Then when Mahatma Bhaargava used his knowledge to call me, then somehow after attaining a full life I was able to come here to you.'॥ 39॥ |
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