श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 76: कचका शिष्यभावसे शुक्राचार्य और देवयानीकी सेवामें संलग्न होना और अनेक कष्ट सहनेके पश्चात् मृतसंजीवनी विद्या प्राप्त करना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  1.76.39 
आहूतो विद्यया भद्रे भार्गवेण महात्मना।
त्वत्समीपमिहायात: कथंचित् समजीवित:॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
'भरे! फिर जब महात्मा भार्गव ने अपनी विद्या से मुझे बुलाया, तब किसी प्रकार पूर्ण आयु प्राप्त करके मैं यहाँ आपके पास आ सका।'॥39॥
 
'Bhaare! Then when Mahatma Bhaargava used his knowledge to call me, then somehow after attaining a full life I was able to come here to you.'॥ 39॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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