श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 76: कचका शिष्यभावसे शुक्राचार्य और देवयानीकी सेवामें संलग्न होना और अनेक कष्ट सहनेके पश्चात् मृतसंजीवनी विद्या प्राप्त करना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  1.76.37 
असुरास्तत्र मां दृष्ट्वा कस्त्वमित्यभ्यचोदयन्।
बृहस्पतिसुतश्चाहं कच इत्यभिविश्रुत:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
मुझे वहाँ देखकर राक्षसों ने पूछा, ‘तुम कौन हो?’ मैंने कहा, ‘मेरा नाम कच है। मैं बृहस्पति का पुत्र हूँ।’ 37.
 
Seeing me there, the demons asked, 'Who are you?' I said, 'My name is Kacha. I am Brihaspati's son.' 37.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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