श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 76: कचका शिष्यभावसे शुक्राचार्य और देवयानीकी सेवामें संलग्न होना और अनेक कष्ट सहनेके पश्चात् मृतसंजीवनी विद्या प्राप्त करना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  1.76.33 
शुक्र उवाच
अयमेहीति संशब्द्य मृतं संजीवयाम्यहम्।
तत: संजीविनीं विद्यां प्रयुज्य कचमाह्वयत्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
शुक्राचार्य ने कहा- (पुत्री! चिंता मत करो।) मैं मृत कच को 'आओ' कहकर जीवित कर दूँगा। यह कहकर उन्होंने संजीवनी विद्या का प्रयोग किया और कच को बुलाया।
 
Shukracharya said- (Daughter! Don't worry.) I will bring the dead Kacha back to life by calling him 'come'. Saying this, he used Sanjivani Vidya and called Kacha.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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