Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.76.31: देवयानी बोली- प्रभु! आपने अग्निहोत्र किया है और सूर्यदेव भी पश्चिम दिशा में चले गए हैं। गौएँ भी आज बिना रक्षक के लौट आई हैं। पिताजी! अभी तक कच्छ दिखाई नहीं दे रहा है। 31। | mahabharat अध्याय 1.76: कचका शिष्यभावसे शुक्राचार्य और देवयानीकी सेवामें संलग्न होना और अनेक कष्ट सहनेके पश्चात् मृतसंजीवनी विद्या प्राप्त करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
देवयान्युवाच
आहुतं चाग्निहोत्रं ते सूर्यश्चास्तं गत: प्रभो।
अगोपाश्चागता गाव: कचस्तात न दृश्यते॥ ३१॥
अनुवाद
देवयानी बोली- प्रभु! आपने अग्निहोत्र किया है और सूर्यदेव भी पश्चिम दिशा में चले गए हैं। गौएँ भी आज बिना रक्षक के लौट आई हैं। पिताजी! अभी तक कच्छ दिखाई नहीं दे रहा है। 31।
Devyani said— Prabhu! You have performed Agnihotra and the Sun God has also gone to the west. The cows have also returned today without a protector. Father! Still Kachha is not visible. 31.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥