Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.76.3-4: वैशम्पायन ने कहा, "जनमेजय! राजा ययाति देवराज इन्द्र के समान ही प्रतापी थे। यदि आप पूछें, तो मैं आपको पूर्वकाल में शुक्राचार्य और वृषपर्वण ने किस प्रकार अपनी पुत्रियों के पति के रूप में ययाति को चुना था, यह सब बताऊँगा। मैं यह भी बताऊँगा कि नहुषनंदन ययाति और देवयानी का मिलन किस प्रकार हुआ।" 3-4 | mahabharat अध्याय 1.76: कचका शिष्यभावसे शुक्राचार्य और देवयानीकी सेवामें संलग्न होना और अनेक कष्ट सहनेके पश्चात् मृतसंजीवनी विद्या प्राप्त करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायन ने कहा, "जनमेजय! राजा ययाति देवराज इन्द्र के समान ही प्रतापी थे। यदि आप पूछें, तो मैं आपको पूर्वकाल में शुक्राचार्य और वृषपर्वण ने किस प्रकार अपनी पुत्रियों के पति के रूप में ययाति को चुना था, यह सब बताऊँगा। मैं यह भी बताऊँगा कि नहुषनंदन ययाति और देवयानी का मिलन किस प्रकार हुआ।" 3-4
Vaishampayana said, 'Janamejaya! King Yayati was as illustrious as the king of gods Indra. If you ask, I will tell you all the incidents of how Shukracharya and Vrishparvana chose Yayati as the husband of their daughters in the past. I will also tell you how Nahushanandan Yayati and Devayani came together.' 3-4
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥