Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.76.25: भरत! आचार्य देवयानी की पुत्री भी युवावस्था में प्रवेश कर चुकी थी। कच्छ उसके लिए फूल-फल लाता और जो कुछ वह कहती, वह करता। इस प्रकार उसकी सेवा करके वह उसे सदैव प्रसन्न रखता॥ 25॥ | mahabharat अध्याय 1.76: कचका शिष्यभावसे शुक्राचार्य और देवयानीकी सेवामें संलग्न होना और अनेक कष्ट सहनेके पश्चात् मृतसंजीवनी विद्या प्राप्त करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भरत! आचार्य देवयानी की पुत्री भी युवावस्था में प्रवेश कर चुकी थी। कच्छ उसके लिए फूल-फल लाता और जो कुछ वह कहती, वह करता। इस प्रकार उसकी सेवा करके वह उसे सदैव प्रसन्न रखता॥ 25॥
Bharat! The daughter of Acharya Devyani had also entered her youth. Kachha would bring flowers and fruits for her and would do whatever she asked him to do. Thus, by serving her, he would always keep her happy.॥ 25॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥