श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 76: कचका शिष्यभावसे शुक्राचार्य और देवयानीकी सेवामें संलग्न होना और अनेक कष्ट सहनेके पश्चात् मृतसंजीवनी विद्या प्राप्त करना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  1.76.19 
ऋषेरङ्गिरस: पौत्रं पुत्रं साक्षाद् बृहस्पते:।
नाम्ना कचमिति ख्यातं शिष्यं गृह्णातु मां भवान्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
'प्रभो! मैं अंगिरा ऋषि का पौत्र और बृहस्पति का पुत्र हूँ। मेरा नाम कच है। कृपया मुझे अपना शिष्य स्वीकार करें।॥19॥
 
'Lord! I am the grandson of sage Angira and the son of Brihaspati himself. My name is Kach. Please accept me as your disciple.॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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