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श्लोक 1.76.17  |
तथेत्युक्त्वा तत: प्रायाद् बृहस्पतिसुत: कच:।
तदाभिपूजितो देवै: समीपे वृषपर्वण:॥ १७॥ |
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| अनुवाद |
| फिर 'बहुत अच्छा' कहकर बृहस्पतिपुत्र कच देवताओं से सम्मानित होकर वहाँ से वृषपर्वा के पास चला गया ॥17॥ |
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| Then saying 'very good', Brihaspati's son got honored by the Kacha gods and from there he went near Vrishparva. 17॥ |
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