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श्लोक 1.76.14  |
रक्षते दानवांस्तत्र न स रक्षत्यदानवान्।
तमाराधयितुं शक्तो भवान् पूर्ववया: कविम्॥ १४॥ |
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| अनुवाद |
| वहाँ रहकर वे राक्षसों की रक्षा करते हैं। जो राक्षस नहीं हैं, उनकी रक्षा वे नहीं करते। तुम अभी नई अवस्था में हो, अतः तुम शुक्राचार्य की पूजा करने के योग्य हो।॥14॥ |
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| ‘Living there he protects the demons. He does not protect those who are not demons. You are still in a new stage, so you are capable of worshipping (pleasuring) Shukracharya.'॥ 14॥ |
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