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mahabharat 1.76.1-2: जनमेजय ने पूछा- हे तपस्वी! प्रजापति की दसवीं पीढ़ी में उत्पन्न हमारे पूर्वज महाराज ययाति ने शुक्राचार्य की अत्यंत दुर्लभ कन्या देवयानी को किस प्रकार पत्नी रूप में प्राप्त किया? मैं यह कथा विस्तारपूर्वक सुनना चाहता हूँ। कृपया मुझे सभी वंश-प्रवर्तक राजाओं का पृथक-पृथक वर्णन कीजिए॥1-2॥   |   mahabharat अध्याय 1.76: कचका शिष्यभावसे शुक्राचार्य और देवयानीकी सेवामें संलग्न होना और अनेक कष्ट सहनेके पश्चात् मृतसंजीवनी विद्या प्राप्त करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 76: कचका शिष्यभावसे शुक्राचार्य और देवयानीकी सेवामें संलग्न होना और अनेक कष्ट सहनेके पश्चात् मृतसंजीवनी विद्या प्राप्त करना  »  श्लोक 1-2
 
 
श्लोक  1.76.1-2 
जनमेजय उवाच
ययाति: पूर्वजोऽस्माकं दशमो य: प्रजापते:।
कथं स शुक्रतनयां लेभे परमदुर्लभाम्॥ १॥
एतदिच्छाम्यहं श्रोतुं विस्तरेण तपोधन।
आनुपूर्व्या च मे शंस राज्ञो वंशकरान् पृथक्॥ २॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय ने पूछा- हे तपस्वी! प्रजापति की दसवीं पीढ़ी में उत्पन्न हमारे पूर्वज महाराज ययाति ने शुक्राचार्य की अत्यंत दुर्लभ कन्या देवयानी को किस प्रकार पत्नी रूप में प्राप्त किया? मैं यह कथा विस्तारपूर्वक सुनना चाहता हूँ। कृपया मुझे सभी वंश-प्रवर्तक राजाओं का पृथक-पृथक वर्णन कीजिए॥1-2॥
 
Janamejaya asked— O ascetic! How did our ancestor Maharaja Yayati, who was born in the tenth generation from Prajapati, get the extremely rare daughter of Shukracharya, Devayani, as his wife? I want to hear this story in detail. Please describe to me all the dynasty-founder kings separately.॥1-2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)