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mahabharat 1.75.6: विरिणी के साथ समागम करके प्रचेतस ऋषि दक्ष ने अपने ही समान गुण और चरित्र वाले एक हजार पुत्र उत्पन्न किए। वे सभी कठोर व्रतों का पालन करने वाले थे।   |   mahabharat अध्याय 1.75: दक्ष, वैवस्वत मनु तथा उनके पुत्रोंकी उत्पत्ति; पुरूरवा, नहुष और ययातिके चरित्रोंका संक्षेपसे वर्णन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 75: दक्ष, वैवस्वत मनु तथा उनके पुत्रोंकी उत्पत्ति; पुरूरवा, नहुष और ययातिके चरित्रोंका संक्षेपसे वर्णन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.75.6 
वीरिण्या सह संगम्य दक्ष: प्राचेतसो मुनि:।
आत्मतुल्यानजनयत् सहस्रं संशितव्रतान्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
विरिणी के साथ समागम करके प्रचेतस ऋषि दक्ष ने अपने ही समान गुण और चरित्र वाले एक हजार पुत्र उत्पन्न किए। वे सभी कठोर व्रतों का पालन करने वाले थे।
 
After having intercourse with Virini, sage Prachetas Daksha produced a thousand sons having qualities and character like himself. All of them were very strict observers of vows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)