Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.75.57-58: वैशम्पायनजी कहते हैं - नृपश्रेष्ठ! तत्पश्चात् पुरुक का राज्याभिषेक होने पर राजा ययाति अपनी पत्नियों सहित भृगुतुंग पर्वत पर गए और वहाँ उत्तम कर्मों का अनुष्ठान करते हुए घोर तप किया। इस प्रकार दीर्घकाल तक स्त्रियों सहित निराहार रहकर उपवास करने के पश्चात् उन्होंने स्वर्ग प्राप्त किया। 57-58॥ | mahabharat अध्याय 1.75: दक्ष, वैवस्वत मनु तथा उनके पुत्रोंकी उत्पत्ति; पुरूरवा, नहुष और ययातिके चरित्रोंका संक्षेपसे वर्णन । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायनजी कहते हैं - नृपश्रेष्ठ! तत्पश्चात् पुरुक का राज्याभिषेक होने पर राजा ययाति अपनी पत्नियों सहित भृगुतुंग पर्वत पर गए और वहाँ उत्तम कर्मों का अनुष्ठान करते हुए घोर तप किया। इस प्रकार दीर्घकाल तक स्त्रियों सहित निराहार रहकर उपवास करने के पश्चात् उन्होंने स्वर्ग प्राप्त किया। 57-58॥
Vaishampayanji says – Nripashrestha! Thereafter, after the coronation of Puruka, King Yayati along with his wives went to Bhrigutunga mountain and performed severe penance there, performing rituals of good deeds. In this way, after a long period of time, he attained heaven by fasting without food along with the women. 57-58॥
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि सम्भवपर्वणि ययात्युपाख्याने पञ्चसप्ततितमोऽध्याय:॥ ७५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत सम्भवपर्वमें ययात्युपाख्यानविषयक पचहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७५॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥