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mahabharat 1.75.52: "जब मनुष्य मन, वाणी और कर्म से किसी भी प्राणी के प्रति द्वेष नहीं रखता, तब वह ब्रह्म को प्राप्त हो जाता है।" ॥52॥   |   mahabharat अध्याय 1.75: दक्ष, वैवस्वत मनु तथा उनके पुत्रोंकी उत्पत्ति; पुरूरवा, नहुष और ययातिके चरित्रोंका संक्षेपसे वर्णन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 75: दक्ष, वैवस्वत मनु तथा उनके पुत्रोंकी उत्पत्ति; पुरूरवा, नहुष और ययातिके चरित्रोंका संक्षेपसे वर्णन  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  1.75.52 
यदा न कुरुते पापं सर्वभूतेषु कर्हिचित्।
कर्मणा मनसा वाचा ब्रह्म सम्पद्यते तदा॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
"जब मनुष्य मन, वाणी और कर्म से किसी भी प्राणी के प्रति द्वेष नहीं रखता, तब वह ब्रह्म को प्राप्त हो जाता है।" ॥52॥
 
"When a man does not have any ill feeling towards any living being by thought, speech or action, then he attains Brahma." ॥ 52॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)