Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.75.48: अपनी दोनों पत्नियों के साथ लम्बा समय बिताने के बाद, वह चैत्ररथ वन में गए और दिव्य अप्सरा विश्वाची की संगति का आनन्द लिया।   |   mahabharat अध्याय 1.75: दक्ष, वैवस्वत मनु तथा उनके पुत्रोंकी उत्पत्ति; पुरूरवा, नहुष और ययातिके चरित्रोंका संक्षेपसे वर्णन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 75: दक्ष, वैवस्वत मनु तथा उनके पुत्रोंकी उत्पत्ति; पुरूरवा, नहुष और ययातिके चरित्रोंका संक्षेपसे वर्णन  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  1.75.48 
ययातिरपि पत्नीभ्यां दीर्घकालं विहृत्य च।
विश्वाच्या सहितो रेमे पुनश्चैत्ररथे वने॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
अपनी दोनों पत्नियों के साथ लम्बा समय बिताने के बाद, वह चैत्ररथ वन में गए और दिव्य अप्सरा विश्वाची की संगति का आनन्द लिया।
 
After spending a long time with his two wives, he went to the Chaitrarath forest and enjoyed the company of the celestial nymph Vishwachi.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)