श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 75: दक्ष, वैवस्वत मनु तथा उनके पुत्रोंकी उत्पत्ति; पुरूरवा, नहुष और ययातिके चरित्रोंका संक्षेपसे वर्णन  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  1.75.45 
एवमुक्त: स राजर्षिस्तपोवीर्यसमाश्रयात्।
संचारयामास जरां तदा पुत्रे महात्मनि॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
पुरु की यह बात सुनकर राजा ययाति ने अपनी तपस्या और पराक्रम से अपनी वृद्धावस्था अपने महापुरुष पुरु को सौंप दी ॥ 45॥
 
Upon hearing Puru say this, the king Yayati, by his austerity and valour, transferred his old age to his great son Puru. ॥ 45॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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