श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 75: दक्ष, वैवस्वत मनु तथा उनके पुत्रोंकी उत्पत्ति; पुरूरवा, नहुष और ययातिके चरित्रोंका संक्षेपसे वर्णन  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  1.75.37 
जराभिभूत: पुत्रान् स राजा वचनमब्रवीत्।
यदुं पूरुं तुर्वसुं च द्रुह्युं चानुं च भारत॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय! वृद्धावस्था से आक्रांत होकर राजा यया ने अपने सभी पुत्रों यदु, पुरु, तुर्वसु, द्रुह्यु और अनुस से कहा - 37॥
 
Janamejaya! Being attacked by old age, King Yaya said to all his sons Yadu, Puru, Turvasu, Druhyu and Anus - 37॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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