Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.75.36: राजन! वह सदैव धर्मपूर्वक अपनी प्रजा का पालन करता था। एक समय नहुष के पुत्र ययाति को अत्यंत भयंकर वृद्धावस्था प्राप्त हुई, जो रूप और सौन्दर्य को नष्ट कर देने वाली थी। 36॥ | mahabharat अध्याय 1.75: दक्ष, वैवस्वत मनु तथा उनके पुत्रोंकी उत्पत्ति; पुरूरवा, नहुष और ययातिके चरित्रोंका संक्षेपसे वर्णन । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राजन! वह सदैव धर्मपूर्वक अपनी प्रजा का पालन करता था। एक समय नहुष के पुत्र ययाति को अत्यंत भयंकर वृद्धावस्था प्राप्त हुई, जो रूप और सौन्दर्य को नष्ट कर देने वाली थी। 36॥
Rajan! He always followed his people religiously. Once upon a time, Nahush's son Yayati attained a very dreadful old age, which destroys the form and beauty. 36॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥