Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.75.3-4: प्रचेतस के दस पुत्र थे, जो अपने तेज से सदैव प्रकाशित रहते थे। वे सभी महर्षियों के समान तेजस्वी, धर्मात्मा और पुण्यात्मा माने जाते थे। पूर्वकाल में उन्होंने अपने मुख से उत्पन्न अग्नि से उन बड़े-बड़े वृक्षों को (जो प्राणियों को कष्ट पहुँचा रहे थे) जलाकर भस्म कर दिया था॥3-4॥ | mahabharat अध्याय 1.75: दक्ष, वैवस्वत मनु तथा उनके पुत्रोंकी उत्पत्ति; पुरूरवा, नहुष और ययातिके चरित्रोंका संक्षेपसे वर्णन । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रचेतस के दस पुत्र थे, जो अपने तेज से सदैव प्रकाशित रहते थे। वे सभी महर्षियों के समान तेजस्वी, धर्मात्मा और पुण्यात्मा माने जाते थे। पूर्वकाल में उन्होंने अपने मुख से उत्पन्न अग्नि से उन बड़े-बड़े वृक्षों को (जो प्राणियों को कष्ट पहुँचा रहे थे) जलाकर भस्म कर दिया था॥3-4॥
Prachetas had ten sons, who were always illuminated by their brilliance. All of them were considered to be as radiant as the great sages, virtuous and pious. In the past, they had burnt to ashes those big trees (which were causing pain to the living beings) by the fire produced by their mouth.॥3-4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥