श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 75: दक्ष, वैवस्वत मनु तथा उनके पुत्रोंकी उत्पत्ति; पुरूरवा, नहुष और ययातिके चरित्रोंका संक्षेपसे वर्णन  »  श्लोक 29-31
 
 
श्लोक  1.75.29-31 
पशुवच्चैव तान् पृष्ठे वाहयामास वीर्यवान्।
कारयामास चेन्द्रत्वमभिभूय दिवौकस:॥ २९॥
तेजसा तपसा चैव विक्रमेणौजसा तथा।
यतिं ययातिं संयातिमायातिमयतिं ध्रुवम्॥ ३०॥
नहुषो जनयामास षट् सुतान् प्रियवादिन:।
यतिस्तु योगमास्थाय ब्रह्मभूतोऽभवन्मुनि:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
अपने इन्द्रत्व काल में महाबली नहुष ने महर्षियों को पशुओं के समान वाहनों में परिवर्तित कर उनकी पीठ पर सवार हो लिया था । उन्होंने अपने तेज, तप, पराक्रम और पराक्रम से समस्त देवताओं का तिरस्कार करके इन्द्रपद प्राप्त किया था । राजा नहुष ने छः प्रिय पुत्रों को जन्म दिया, जिनके नाम इस प्रकार हैं - यति, ययाति, संयाति, अयाति, अयाति और ध्रुव । इनमें से एक यति योग का आश्रय लेकर ब्रह्मभूत मुनि हुए । 29-31॥
 
During his Indratva period, the mighty Nahusha had transformed the Maharishis into vehicles like animals and rode on their backs. He had attained Indrapada by scorning all the gods through his brilliance, penance, vigor and bravery. King Nahusha gave birth to six beloved sons, whose names are as follows – Yati, Yayati, Sanyati, Ayati, Ayati and Dhruva. Among them, by taking shelter of Yeti Yoga, he became Brahmabhuta Muni. 29-31॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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