Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.75.15-17: उनमें से ब्राह्मण जाति के लोगों ने वेदों को छह अंगों सहित आत्मसात कर लिया। वेन, धृष्णु, नरिष्यन्त, नाभग, इक्ष्वाकु, करुष, शर्याति, आठवें इला, नौवें क्षत्रिय-धर्मपरायण पृषध्र और दसवें नाभागरिष्ट- ये दस मनुपुत्र कहलाते हैं। इस धरती पर मनु के पचास और पुत्र थे। 15-17 | mahabharat अध्याय 1.75: दक्ष, वैवस्वत मनु तथा उनके पुत्रोंकी उत्पत्ति; पुरूरवा, नहुष और ययातिके चरित्रोंका संक्षेपसे वर्णन । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उनमें से ब्राह्मण जाति के लोगों ने वेदों को छह अंगों सहित आत्मसात कर लिया। वेन, धृष्णु, नरिष्यन्त, नाभग, इक्ष्वाकु, करुष, शर्याति, आठवें इला, नौवें क्षत्रिय-धर्मपरायण पृषध्र और दसवें नाभागरिष्ट- ये दस मनुपुत्र कहलाते हैं। इस धरती पर मनु के पचास और पुत्र थे। 15-17
Among them, the Brahmin caste people imbibed the Vedas along with the six limbs. Ven, Dhrishnu, Narishyant, Nabhag, Ikshvaku, Karush, Sharyati, eighth Ila, ninth Kshatriya-devout Prishadhra and tenth Nabhagarishta - these ten are called Manuputras. Manu had fifty more sons on this earth. 15-17
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥