Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.75.1-3h: वैशम्पायनजी कहते हैं - हे निष्पाप जनमेजय! अब मैं तुम्हें दक्ष प्रजापति, वैवस्वत मनु, भरत, कुरु, पुरु, अजमीढ़, यादव, कौरव और भरतवंशियों की कुल परम्परा का वर्णन करूँगा। इनका कुल परम पवित्र, परम शुभ तथा धन, यश और दीर्घायु की प्राप्ति कराने वाला है। 1-2 1/2॥ | mahabharat अध्याय 1.75: दक्ष, वैवस्वत मनु तथा उनके पुत्रोंकी उत्पत्ति; पुरूरवा, नहुष और ययातिके चरित्रोंका संक्षेपसे वर्णन । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायनजी कहते हैं - हे निष्पाप जनमेजय! अब मैं तुम्हें दक्ष प्रजापति, वैवस्वत मनु, भरत, कुरु, पुरु, अजमीढ़, यादव, कौरव और भरतवंशियों की कुल परम्परा का वर्णन करूँगा। इनका कुल परम पवित्र, परम शुभ तथा धन, यश और दीर्घायु की प्राप्ति कराने वाला है। 1-2 1/2॥
Vaishampayanji says – Sinless Janamejaya! Now I will describe to you the family traditions of Daksh Prajapati, Vaivaswat Manu, Bharat, Kuru, Puru, Ajmidh, Yadav, Kaurava and Bharatvanshis. His clan is most pious, very auspicious and gives attainment of wealth, fame and longevity. 1-2 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥