Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.74.d92-d93h: तब महाराज दुष्यंत ने भरत को राज्य का भार सौंपकर कृतार्थ किया। सौ वर्षों तक राज्य भोगने और नाना प्रकार के दान देने के पश्चात् अन्त में वे स्वर्गलोक पहुँचे।   |   mahabharat अध्याय 1.74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक  »  श्लोक d92-d93h
 
 
श्लोक  1.74.d92-d93h 
(भरते भारमावेश्य कृतकृत्योऽभवन्नृप:।
ततो वर्षशतं पूर्णं राज्यं कृत्वा नराधिप:॥
कृत्वा दानानि दुष्यन्त: स्वर्गलोकमुपेयिवान्।)
 
 
अनुवाद
तब महाराज दुष्यंत ने भरत को राज्य का भार सौंपकर कृतार्थ किया। सौ वर्षों तक राज्य भोगने और नाना प्रकार के दान देने के पश्चात् अन्त में वे स्वर्गलोक पहुँचे।
 
Then Maharaj Dushyant was grateful by handing over the charge of the kingdom to Bharat. After enjoying the kingdom for a hundred years and giving various types of donations, he finally reached heaven.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)