Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.74.d82-d83h: 'हे विशाल नेत्रों वाली देवि! इसी प्रकार आप भी मेरे द्वारा कहे गए असत्य, अप्रिय, कटु एवं पापपूर्ण वचनों को क्षमा करें। पति के प्रति क्षमा भावना रखने से स्त्रियाँ पतिव्रता धर्म को प्राप्त करती हैं। | mahabharat अध्याय 1.74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'हे विशाल नेत्रों वाली देवि! इसी प्रकार आप भी मेरे द्वारा कहे गए असत्य, अप्रिय, कटु एवं पापपूर्ण वचनों को क्षमा करें। पति के प्रति क्षमा भावना रखने से स्त्रियाँ पतिव्रता धर्म को प्राप्त करती हैं।
'Goddess with huge eyes! Similarly, you should also forgive me for the untruthful, unpleasant, bitter and sinful words spoken by me. By having a feeling of forgiveness for the husband, women attain the duty of devotion to their husbands.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥