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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक  »  श्लोक d81
 
 
श्लोक  1.74.d81 
(ब्राह्मणा: क्षत्रिया वैश्या: शूद्राश्चैव पृथग्विधा:।
त्वां देवि पूजयिष्यन्ति निर्विशङ्कं पतिव्रताम्॥ )
 
 
अनुवाद
'देवी! तुम निःसंदेह अपने पति के प्रति पतिव्रता हो। ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र- ये सभी अलग-अलग तुम्हारी पूजा करेंगे।
 
‘Devi! You are undoubtedly faithful to your husband. Brahmins, Kshatriyas, Vaishyas and Shudras – all of them will worship you separately.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)